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नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद से लगातार गठबंधन सरकारें ही बनती रही हैं। कुछ चुनावों में नेपाली कांग्रेस व नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के बीच मुकाबला होता रहा है। 18 वर्षों में नेपाल ने 14 सरकारें देखी हैं। अब नेपाल में स्थिर सरकार बनने की उम्मीद है। चुनाव के नतीजों में काठमांडो के पूर्व मेयर और रैपर बालेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सरकार बनाने की सबसे बड़ी दावेदार बनकर सामने आई है। जेन-जी आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे बालेंद्र शाह बालेन का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है। देर शाम तक आए रुझानों-नतीजों के मुताबिक, आरएसपी 109 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि 6 सीटें उसने जीत ली हैं।
पिछले साल जेन-जी आंदोलन के कारण सत्ता गंवाने वाले पूर्व पीएम और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली झापा-5 सीट पर गिनती शुरू होते ही बालेंद्र से पिछड़ गए। देर रात तक वह 10 हजार से अधिक वोटों से पीछे थे। ताजा रुझानों के मुताबिक, नेपाली कांग्रेस और नेकपा-एमाले, दोनों ही 11-11 सीटों पर आगे चल रही थीं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी 7 सीटों पर आगे चल रही थी। नेपाली कांग्रेस ने दो और नेकपा ने एक सीट पर जीत दर्ज कर ली। नेकपा के नेता और पूर्व पीएम पुष्पकमल दहल प्रचंड ने रुकुम पूर्व सीट पर जीत हासिल कर ली है। यह उनकी पांचवीं जीत है.
मेयर से पीएम की कुर्सी के करीब
27 अप्रैल, 1990 को काठमांडो में जन्मे बालेंद्र पेशे से स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं। बाद में रैपर बने और फिर सियायत में उतरे। 2022 में काठमांडो के 15वें मेयर बने। सोशल मीडिया पर राजनेताओं व नौकरशाही के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर खूब सुर्खियां बटोरीं और पिछले साल हिंसक आंदोलन के दौरान जेन-जी का चेहरा बनकर उभरे। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें आगे दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया।
भारत की है नजर चीन विरोधी हैं बालेंद्र नेपाल के चुनाव नतीजों कोभारत के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने एक दिन पहले कहा था कि भारत नई सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। आरएसपी की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार घोषित बालेन चीन विरोधी रुख रखते हैं, ऐसे में उनके सत्ता में आने को रणनीतिक रूप से भारत के लिए अच्छा संकेत कहा जा सकता है।